केकड़ी : सरवाड़ क्षेत्र की डाई नदी में बजरी खनन को लेकर वर्षों पुराना विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। वर्ष 2012 में पंकज सिंह जादौन के नाम से इस क्षेत्र में खनन लीज स्वीकृत हुई थी, लेकिन उसी दौरान मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हो गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बजरी खनन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिसके बाद वैधानिक प्रक्रिया पूरी करते हुए खनन का मार्ग प्रशस्त हुआ।बताया जा रहा है कि 30 मार्च 2023 को पंकज सिंह जादौन ग्रुप के लोग जब सरवाड़ क्षेत्र में खनन कार्य शुरू करने पहुंचे, तो स्थानीय लोगों ने उन्हें नदी क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया। इस दौरान मारपीट और विवाद की स्थिति भी बनी। जबकि सरकारी नियमों के तहत लीजधारक द्वारा करीब 54 लाख 47 हजार 245 रुपए की राशि जमा कराई जा चुकी है और सरकार द्वारा 433 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन लीज स्वीकृत की गई है।

सनोदिया गांव में भी विवाद, खनन कार्य ठप

गोयला क्षेत्र के सनोदिया गांव में खसरा संख्या 175 पर करीब 73 बीघा नदी क्षेत्र में लीज स्वीकृत है, लेकिन यहां भी रॉयल्टी संचालक को बजरी निकालने नहीं दिया जा रहा। संचालक वर्षों से तुलाई के लिए कांटा (वजन मशीन) लगाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के चलते यह संभव नहीं हो पाया।

अवैध खनन माफिया हावी, प्रशासन मौन

क्षेत्र में हालात ऐसे हैं कि वैध लीजधारक खनन नहीं कर पा रहा, जबकि अवैध खनन करने वाले माफिया खुलेआम सक्रिय हैं। खिरिया, गोयला, अरवड़, जावला सहित पूरे इलाके में दिन-रात जेसीबी और ट्रैक्टरों के जरिए बजरी का अवैध खनन किया जा रहा है।सूत्रों के अनुसार, अवैध खनन करने वाले लोग सरकारी कार्रवाई से बचने के लिए बजरी का स्टॉक सरकारी भूमि पर ही जमा कर रहे हैं, ताकि कानूनी शिकंजे से बच सकें। हैरानी की बात यह है कि यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।

4 साल से दर-दर भटक रहा लीजधारक

रॉयल्टी संचालक पिछले चार वर्षों से तहसीलदार, थानेदार, उपखंड अधिकारी से लेकर जिला कलेक्टर तक ज्ञापन दे चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार शिकायतों के बावजूद अवैध खनन पर रोक नहीं लगना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। क्षेत्र में भय का माहौल अवैध बजरी माफिया के बढ़ते प्रभाव के चलते पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोग खुलकर विरोध करने से कतराते हैं, वहीं वैध लीजधारक भी खुद को असहाय महसूस कर रहा है।

बड़ा सवाल

जब सरकार को लाखों रुपये की राजस्व राशि जमा हो चुकी है और लीज वैध रूप से स्वीकृत है, तो आखिर वैध खनन क्यों बाधित है? और अवैध खनन करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही सरवाड़ डाई नदी क्षेत्र में बजरी खनन को लेकर स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। यदि समय रहते प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह विवाद और गहरा सकता है। जरूरत है पारदर्शी कार्रवाई और वैध लीजधारकों को संरक्षण देने की, ताकि सरकारी राजस्व की भी रक्षा हो सके और अवैध खनन पर लगाम लग सके।