केकड़ी में स्वर्ण प्राशन शिविर का आयोजन: बच्चों में बल और बुद्धि को बढ़ावा देने का अनूठा प्रयास
केकड़ी, 30 अगस्त 2024 - बढ़ते कदम गौशाला संस्थान केकड़ी और डाबर इंडिया लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में, राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय केकड़ी में शुक्रवार को ए
Govind Vaishnav
Chief Editor
Aug 30, 2024 • 7:27 AM IST
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केकड़ी, 30 अगस्त 2024 - बढ़ते कदम गौशाला संस्थान केकड़ी और डाबर इंडिया लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में, राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय केकड़ी में शुक्रवार को एक विशेष स्वर्ण प्राशन शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में छह माह से 16 वर्ष तक के 1029 बच्चों को स्वर्ण प्राशन की खुराक दी गई, जिसका उद्देश्य बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, स्मरण शक्ति, और बुद्धिमत्ता को बढ़ाना था।

स्वर्ण प्राशन आयुर्वेद की एक प्राचीन विधि है, जिसे बच्चों में स्वास्थ्य और बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह न केवल बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि उनकी स्मरण शक्ति और बुद्धिमत्ता को भी उत्तम बनाता है। शिविर का उद्घाटन राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रंजना जैन, डॉ. विकास गजराज, और बढ़ते कदम गौशाला के अध्यक्ष अशोक पारीक और आनंद सोमानी द्वारा भगवान धन्वंतरी के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
शिविर में सुबह नौ बजे से ही अभिभावक अपने बच्चों को लेकर शिविर स्थल पर पहुंच गए थे। दोपहर तीन बजे तक चलने वाले इस शिविर में बच्चों को स्वर्ण प्राशन की तीन से छह बूंदें दी गईं, जिसके बाद आधे घंटे तक उन्हें आहार नहीं दिया गया। यह विधि विशेष रूप से संक्रमण की आशंका और मौसमी बीमारियों के प्रकोप को ध्यान में रखते हुए अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।

शिविर का आयोजन डॉ. ललिता मीना के मार्गदर्शन में किया गया। राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी इस शिविर में सक्रिय भागीदारी की, जिसमें जीविधा माली, खुशबु राज, गोपाल कुमावत, कशिश शर्मा, रोहित, कैलाश बिश्नोई, तुलसी, जगदीश देवाशी, अंकिता, पवन सैनी, प्रिंसी, सना, गर्विता सिंह, मिनाल सुथरा, रूपाल, और विकास मीना ने बच्चों का वजन और लंबाई मापने, दवा पिलाने, और रजिस्ट्रेशन करने में सहायता की।

स्वर्ण प्राशन संस्कार क्या है?
स्वर्ण प्राशन संस्कार आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में वर्णित एक विधि है, जो प्राकृतिक तरीके से बच्चों को स्वास्थ्य और बुद्धिमत्ता प्रदान करती है। इस विधि में स्वर्ण को शहद, घी, या अन्य औषधीय द्रव्यों के साथ मिलाकर बच्चों को दिया जाता है। स्वर्ण को बहुत सूक्ष्म रूप में तैयार किया जाता है, ताकि यह बच्चों के लिए सुरक्षित और लाभकारी हो।
बढ़ते कदम गौशाला संस्थान के मीडिया प्रभारी महेंद्र प्रधान ने बताया कि प्रत्येक माह पुष्य नक्षत्र की तिथि में इस प्रकार के शिविर का आयोजन किया जाता है, जो बच्चों के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। इस बार के आयोजन ने स्थानीय समुदाय में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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