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वीर बाल दिवस: केकड़ी में साहिबजादों के बलिदान को नमन
केकड़ी:- बंजारा मोहल्ला स्थित सिंधी मंदिर में शहर भाजपा अध्यक्ष अनिल राठी की अध्यक्षता में वीर बाल दिवस मनाया गया। सिंधी समाज मीडिया प्रभारी राम चंद टह
Govind Vaishnav
Chief Editor
Dec 26, 2024 • 7:37 AM IST
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केकड़ी:- बंजारा मोहल्ला स्थित सिंधी मंदिर में शहर भाजपा अध्यक्ष अनिल राठी की अध्यक्षता में वीर बाल दिवस मनाया गया। सिंधी समाज मीडिया प्रभारी राम चंद टहलानी ने बताया कि इस अवसर पर अनिल राठी समाज संरक्षक बलराज मेहरचंदानी,सुरेश सेन बहन सावित्री हरवानी ने अपने विचार प्रकट किये। वक्ताओं ने अपने विचारों में कहा कि धन्यवाद देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जिन्होंने आमजन को गुरु गोविंद सिंह जी के 4 साहबजादे अजीत सिंह,जुझार सिंह, जोरावर सिंह,फतेह सिंह का नाम अवगत कराया उन वीर बालकों का जिन्होंने हिंदू संस्कृति,धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया और उनकी याद में उसके लिए 26 दिसंबर वीर बाल दिवस मनाने की घोषणा की गई।

गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के चार साहिबजादे जिनमें से दो साहिबजादे जिन्होंने अपना धर्म नहीं बदला और मुगलों से लड़ाई लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए और दो साहिबजादे जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने आप को खुशी-खुशी दीवार में चुनवाना स्वीकार किया। जब दो भाइयों साहिबजादा जोरावर सिंह(9 वर्ष) साहिबज़ादा फतेह सिंह (7 वर्ष ) को दीवार में चुनवाया जा रहा था तो बड़े भाई के आंखों में आंसू थे तब छोटे भाई ने पूछा भाई आपकी आंखों में आंसू क्यों तो बड़े भाई ने कहा कि जन्म तो पहले मैंने लिया लेकिन मुझे पहले तू वीरगति को प्राप्त कर रहा है। सन 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी ने बड़े ही रोचक अंदाज में खालसा पंथ की स्थापना की, जिसका सिख संप्रदाय आज भी पालन करता आ रहा है जब बच्चों को दीवार में चुनवाया जा रहा था तो उनके घुटने बाहर की ओर निकल रहे थे जालिमों ने आरी से उनके घुटने काटकर अलग कर दिए लेकिन बच्चों ने उफ तक नहीं किया और खुशी-खुशी पंथ की रक्षा एवं धर्म की रक्षा के लिए गुलामी कबूल नहीं कर वीरगति को प्राप्त हुए। इस अवसर पर भाजपा कार्यकर्ता महेश बोयत, सिंधी नवयुवक मंडल,सिंधी महिला मंडल के सदस्य गण उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन नरेश कारिहा ने किया, समाज अध्यक्ष चेतन भगतानी में सभी का आभार प्रकट किया।



गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के चार साहिबजादे जिनमें से दो साहिबजादे जिन्होंने अपना धर्म नहीं बदला और मुगलों से लड़ाई लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए और दो साहिबजादे जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने आप को खुशी-खुशी दीवार में चुनवाना स्वीकार किया। जब दो भाइयों साहिबजादा जोरावर सिंह(9 वर्ष) साहिबज़ादा फतेह सिंह (7 वर्ष ) को दीवार में चुनवाया जा रहा था तो बड़े भाई के आंखों में आंसू थे तब छोटे भाई ने पूछा भाई आपकी आंखों में आंसू क्यों तो बड़े भाई ने कहा कि जन्म तो पहले मैंने लिया लेकिन मुझे पहले तू वीरगति को प्राप्त कर रहा है। सन 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी ने बड़े ही रोचक अंदाज में खालसा पंथ की स्थापना की, जिसका सिख संप्रदाय आज भी पालन करता आ रहा है जब बच्चों को दीवार में चुनवाया जा रहा था तो उनके घुटने बाहर की ओर निकल रहे थे जालिमों ने आरी से उनके घुटने काटकर अलग कर दिए लेकिन बच्चों ने उफ तक नहीं किया और खुशी-खुशी पंथ की रक्षा एवं धर्म की रक्षा के लिए गुलामी कबूल नहीं कर वीरगति को प्राप्त हुए। इस अवसर पर भाजपा कार्यकर्ता महेश बोयत, सिंधी नवयुवक मंडल,सिंधी महिला मंडल के सदस्य गण उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन नरेश कारिहा ने किया, समाज अध्यक्ष चेतन भगतानी में सभी का आभार प्रकट किया।



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