केकड़ी। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन राजस्थान प्रदेश के पदाधिकारियों ने गुरुवार को मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी सुरेश कुमार को ज्ञापन सौंपकर निजी विद्यालयों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए 24 जुलाई 2026 तक का अल्टीमेटम दिया। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय तक मांगों का समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशभर के निजी स्कूल आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की होगी।

ज्ञापन में कहा गया कि निजी विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, लेकिन शिक्षा संबलन निरीक्षण व्यवस्था, बार-बार की जांच और आरटीई भुगतान में देरी जैसी समस्याओं के कारण विद्यालयों को अनावश्यक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के अनुसार निजी अनुदानरहित शिक्षण संस्थानों को प्रशासनिक एवं शैक्षणिक स्वायत्तता प्राप्त है तथा सरकार का नियमन केवल शिक्षा की गुणवत्ता और जनहित तक सीमित होना चाहिए।एसोसिएशन ने मांग की कि शिक्षा संबलन निरीक्षण व्यवस्था समाप्त की जाए, नो-ड्यूज के बिना टीसी जारी करने के आदेश दिए जाएं, आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं सहित लंबित सत्रों का भुगतान शुरू किया जाए, दोहरे नामांकन की समस्या का समाधान किया जाए, समय पर दोनों किश्तों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए, यूनिट कॉस्ट में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत वृद्धि की जाए तथा बार-बार जांच और निरीक्षण के नाम पर हो रही प्रताड़ना बंद की जाए। साथ ही निजी विद्यालयों से संबंधित नई नीतियां बनाने से पहले उनके प्रतिनिधि संगठनों से विचार-विमर्श करने की भी मांग की गई। ज्ञापन सौंपने के दौरान मुकेश जैन, भवानी सिंह शक्तावत, अनिरुद्ध दुबे, मनोज कुमावत, अनिल वर्मा सहित प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के सदस्य उपस्थित रहे।